कौन से कल की तलाश है ??


आज की  भागती दौड़ती जिन्दगी में  हमारा समय घर से दफ्तर और दफ्तर से घर के बीच ही सिमट गया है , समय का पता ही नही चलता  कब सुबह से शाम हुई और कब शाम से रात | जिंदगी की उलझनों के बीच में इन्सान कहीं खो सा गया है , वह अपनी रोजमर्रा जिन्दगी में इतना व्यस्त है की उसका आसपास के रहने वाले लोगो से भी कोई व्यक्तिगत  मेल-जोल नही है  उसकी आसपास के लोगो से मुलाकात भी किसी खास अवसर का इंतजार करती है |
 
हम अपने कल को  बेहतर बनाने के लिए ,अपने आज को नष्ट कर रहे है जीवन से जुड़ी तमाम छोटी-छोटी चीजों का लुफ्त उठाना भूल रहे है ,हम अपने अंदर के इन्सान को मार  रहें है जो खुल के जीना चाहता है जो खुल कर हँसना चाहता है |

जिस कल का भरोसा नही ,जो कल किसी ने देखा नही और जो कल कभी आया नही, हम उसके लिए हम अपना आज बर्बाद कर रहे है |
 हां , कल के बारे में सोचना अच्छा है ,अपनी कल की जिंदगी को आज से बेहतर बनाने के लिए उस पर प्रयासरत होना अच्छा है लेकिन उस कल के लिए अपने आज को मत बर्बाद करिये | अपनी इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी से बाहर निकलिए अपने आज के ,अभी के और इस पल को जी लीजिये अपने इस व्यस्त  जीवन से थोड़ा सा समय निकालिए और अपने आज को यादगार बनाइए |
 
ताकि कल को आपके पास बीतें  दिनों के , कुछ यादगार लम्हें हो जिनको याद कर आप इनमे खो सके, मुस्कुरा सके और अपनी आने वाली पीढ़ी को  कुछ अपनी  हंसती ,गुदगुदाती  यादों से रूबरू करा सके |


  लेखन : पूजा अवस्थी

 

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